3 in 1 गणेश जी की आरती

ॐ श्री गणेशाय नमः !

Sambeet / Pixabay

वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ:।
निर्विध्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥

सुखकर्ता दुखहर्ता वार्ता विघ्नाची |
नुरवी पूर्वी प्रेम कृपा जयाची |
सर्वांगी सुंदर उटी शेंदुराची |
कंठी झरके माल मुक्ताफळाची || १ ||

जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती |
दर्शनमात्रे मनकामना पुरती ||

रत्नखचित फरा तूज गौरीकुमरा |
चंदनाची उटी कुंकुमकेशरा |
हिरे जडित मुकुट शोभतो बरा |
रुणझुणती नुपुरे चरणी घागरिया || 2 ||

लंबोदर पितांबर फनी वरवंदना |
सरळ सोंड वक्रतुंड त्रिनयना |
दास रामाचा वाट पाहे सदना |
संकटी पावावे निर्वाणी रक्षावे सुरवंदना |
जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती |
दर्शनमात्रे मनकामना पुरती || ३ ||

घालीन लोटांगण वंदीन चरण |
डोळ्यांनी पाहिन रूप तुझें ||
प्रेमें आलिंगन आनंदे पूजिन |
भावें ओवाळिन म्हणे नामा || १ ||

त्वमेव माता च पिता त्वमेव
त्वमेव बंधुश्च सखा त्वमेव |
त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव
त्वमेव सर्वं मम देवदेव || २ ||

कायेन वाचा मनसेंद्रियैर्वा, बुध्दात्मना व प्रक्रुतिस्वभावअत्
करोमि यद्त्सकलं परस्मै नारायणायेति समर्पयामि || ३ ||

अचयुतं केशवं रामनारायणं क्रुष्णदामोदरं वासुदेवं हरिम् ||
श्रीधरं माधवं गोपिकावल्लभं जानकीनायकं
रामचंद्रं भजे || ४ ||

हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे |
हरे क्रुष्ण हरे क्रुष्ण क्रुष्ण क्रुष्ण हरे हरे || ५ ||

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