जानिए क्यों हैं ख़ास महा मृत्युंजय मंत्र !

शिव का सबसे प्रिय और सबसे प्रवभशाली मंत्र हैं महामृत्युंजय मंत्र

हौं जूं सः। ॐ भूः भुवः स्वः ॐ त्रयम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।

उव्र्वारूकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्।। ॐ स्वः भुवः भूः ॐ । ॐ सः जूं हौं।

यह मंत्र भगवान शिव का सबसे बड़ा और प्रिय मंत्र माना जाता है। हिंदू धर्म में महामृत्युंजय मंत्र को प्राण रक्षक और महामोक्ष मंत्र कहा जाता है। पूराणों के अनुसार महामृत्युंजय मंत्र से भगवान शिव जल्दि प्रसन्न होते है और मन्‍त्र जाप करने वाले जातक से मृत्यु भी डरती है। श्रावन मास में महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने से सौ गुणा ज्‍यादा फल मिलता है।

महामृत्युंजय मंत्र को सिद्ध करने वाला जातक निश्चित ही शिव धाम को प्राप्त करता है। महामृत्युंजय मंत्र ऋषि मार्कंडेय द्वारा सबसे पहले पाया गया था। यह मंत्र व्यक्ति को ना ही केवल मृत्यु भय से मुक्ति दिलाता है, बल्कि उसकी मृत्यु को भी टाल सकता है।

 

महामृत्युंजय मंत्र के जाप से आत्मा के कर्म शुद्ध हो

geralt / Pixabay

जाते हैं आयु, यश की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही यह महामृत्युंजय मंत्र मानसिक,

भावनात्मक, शारीरिक स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक है, लेकिन महामृत्युंजय मंत्र का जाप में कुछ सावधानियां रखना भी जरूरी है क्‍योंकि महामृत्युंजय मंत्र का संपूर्ण लाभ प्राप्त तभी मिलेगा जब इसका सही प्रकार से उच्‍चारण हो सके। ऐसा नही करने पर अनेक प्रकार के अनिष्ट की संभावना बनी रहती है।

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अबाउट Aman Gupta

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