खजुराहो है मध्य प्रदेश का एक मुख्य पर्यटन स्थान !

खजुराहो मध्य प्रदेश का एक प्रसिद्ध पर्यटन स्थान है ! यहाँ खजूर के पेड़ों का एक विशाल बगीचा था जिसकी वजह से इसका नाम खजुराहो पड़ा । लेकिन यह अपने आप में अद्भुत बात है कि यहां कोई भी खजूर के लिए नहीं आता। यहां आने वाले इसके मंदिरों को देखने आते हैं। भारतीय मंदिरों की स्थापत्य कला व शिल्प में खजुराहो की जगह अद्वितीय है। इसकी दो वजहें हैं- एक तो शिल्प की दृष्टि से ये बेजोड़ हैं ही, दूसरी तरफ इनपर स्त्री-पुरुष प्रेम की जो आकृतियां गढ़ी गई हैं, उसकी मिसाल दुनिया में और कहीं नहीं मिलती। यही कारण है कि खजुराहो को यूनेस्को से विश्व विरासत का दरजा मिला हुआ है। भारत आने वाले ज्यादातर विदेशी पर्यटक खजुराहो जरूर आना चाहते हैं। वहीं हम भारतीयों के लिए ये मंदिर एक हजार साल पहले के इतिहास का दस्तावेज हैं।

 

खजुराहो का मुख्य आकर्षण पश्चिमी समूह के मंदिरों में ही है। यहीं ज्यादातर मंदिर हैं- कंदारिया महादेव, लक्ष्मण मंदिर, वराह मंदिर, चित्रगुप्त मंदिर, विश्वनाथ मंदिर, नंदी मंदिर, मतंगेश्वर मंदिर। पश्चिमी समूह का ही चौसठ योगिनी मंदिर परिसर के बाहर थोड़ा अलग जाकर है। लेकिन इस मंदिर से योगिनी की सारी मूर्तियां गायब हैं। ज्यादातर कालांतर में नष्ट हुई तो बाकी को हटाकर संग्रहालयों में रख दिया गया। पूर्वी समूह लगभग तीन किलोमीटर गांव में थोड़ा अंदर जाकर है। यहां समकालीन हिंदू मंदिर तो तीन ही हैं- ब्रह्मा, वामन और जावरी। जैन मंदिरों में पा‌र्श्वनाथ, आदिनाथ, घंटाई मंदिर हैं। जैन मंदिर बाद के दौर में बनाए गए। हिंदू मंदिरों में भी मिथुन मूर्तियां उस भव्यता के साथ नहीं हैं, जैसी पश्चिमी समूह में हैं। मुख्य परिसर से पांच किलोमीटर दूर दक्षिणी समूह है जिसमें दूल्हादेव और चतुर्भुज मंदिर हैं। ये मंदिर भी बाद के दौर में चंदेल वंश के आखिरी राजाओं ने बनवाए। सभी मंदिरों की शैली, बनावट, शिल्प, मंडप, अनूठे हैं, जिनके बारे में विस्तार से जानकारी यहां जाकर पाई जा सकती है।

 

तेरहवीं सदी के बाद ये मंदिर खो से गए। इनके चारों और घने जंगल उग आए। रखरखाव के अभाव और वक्त की मार से इनमें से कई नष्ट भी हो गए। अंग्रेजों के शासनकाल में एक अंग्रेज घुड़सवार अफसर ने इधर से गुजरते हुए इनको खोजा। लेकिन मंदिरों को दुरुस्त करने और इन्हें दुनिया के सामने फिर से पेश करने का सारा काम पिछली सदी के उत्तरार्ध में ही हुआ।

 

खजुराओ मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले में स्थित है जो भोपाल से 350 किलोमीटर दूर है। खजुराहो के लिए दिल्ली (35 मिनट की उड़ान), आगरा (40 मिनट) व वाराणसी (45 मिनट) से सीधी विमान सेवा है।

 

खजुराहो रेल मार्ग से जुड़ा हुआ नहीं है। दिल्ली या उत्तर भारत में अन्य जगहों से आने वालों के लिए झांसी (175 किलोमीटर) ज्यादा उपयुक्त स्टेशन है। जबकि मुंबई, कोलकाता या वाराणसी से आने वालों के लिए सतना (117 किलोमीटर) स्टेशन पर उतरना ठीक रहेगा। सतना, हरपालपुर (94 किलोमीटर), झांसी व महोबा (61 किलोमीटर) से खजुराहो के लिए लगातार बसें उपलब्ध हैं।

 

baluda / Pixabay
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अबाउट Aman Gupta

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