शायरी

रंग प्यार का

तेरी आँखों का रंग जो चढ़ा है मुझपर.. कि ये गुलाल क्या रंग अब लायेगा… तेरे इश्क का नशा जो चढ़ा है मुझपर.. कि भांग क्या मुझे अब भाएगा… ये रंग फीका न होगा.. ये नशा कम न होगा.. मेरा साकी है तू… कि होंठो से आज पिलाएगा… अलंकृता

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मैं और मेरे जज़्बात

किसी ने मुझसे पूछा था.. क्या तुम बदल गई हो..? जवाब में मैं मुस्कुरा दी… फिर पूछा गया… ये मुस्कुराहट किस बात की…? जवाब में मैं फिर मुस्कुरा दी… आज मैं कहती हूँ.. हाँ मैं मुस्कुराई थी.. क्यूँकि मैं बदल गई हूँ… हाँ मैं मुस्कुराई थी.. क्यूँकि तुम मुझे भावुक नहीं कर सकते.. हाँ मैं मुस्कुराई थी.. क्यूँकि तुम मुझे …

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